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नेता, सत्ता और 'सेक्स'

नेता, सत्ता और 'सेक्स'

Wednesday, July 17, 2013, 18:35
नेता, सत्ता और 'सेक्स'रामानुज सिंह
एक बार फिर सेक्स स्कैंडल ने राजनीति और सत्ता को शर्मसार किया है। इस बार मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री राघवजी लपेटे में आए हैं। राधवजी पर नौकर के साथ अप्राकृतिक यौन शोषण का आरोप लगा है जिसके चलते उन्हें अपना मंत्री पद गंवाने के साथ उनके 55 साल के राजनीतिक करियर पर ऐसा बदनुमा दाग लग गया है जिसे मिटाना नामुमकीन है। ऐसा पहली बार नहीं है कि राजनेता का नाम सेक्स स्कैंडल से जुड़ा हो। इससे पहले भी कई राज्यों, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नेताओं के नाम सेक्स स्कैंडल से जुड़ते रहे हैं। दरअसल नेता अय्याशी के इस भवंरजाल में अचानक नहीं आते हैं। इसकी पृष्टभूमि क्रमबद्ध तरीके से तैयार होती है।

जब नेता सत्ता पर काबिज होते हैं, उनमें से कुछ एक सत्ता का दुरुपयोग कर अकूत संपत्ति इकट्ठा कर लेते हैं। इस अवैध संपत्ति से अपनी जरूरतों को पूरा करने के बाद उनका ध्यान विलासिता और अय्याशी की ओर जाता है। अय्याशी में सेक्स का भी महत्वपूर्ण स्थान है जिसकी पूर्ति के लिए अपने धन और सत्ता का बेजा इस्तेमाल करते हैं। पैसा और सत्ता के बल पर इस अय्याशी में शामिल होने वाले नेताओं की कमी नहीं है। सत्ता के मद में ये नेता सही क्या है और गलत क्या है, यह भूल जाते हैं। और फिर अपनी स्वच्छ और सार्वजनिक छवि ख़राब कर बैठते हैं। कई बार इन्हें अपनी गलती का अहसास होता है तो जनता से माफी मांग लेते हैं। कई राजनेता सेक्स स्कैंडल में फंसे हैं। हालांकि इनकी फेहरिस्त लंबी है पर कुछ की चर्चा करना यहां लाजमी होगा।

2011 में राजस्थान सरकार के वरिष्ठ मंत्री महिपाल मदेरणा के भंवरी देवी के साथ सेक्स टेप उजागर होने से राजनीतिक महकमे में भूचाल आ गया था। महिपाल मदेरणा पर भंवरी देवी की हत्या करने का आरोप है। यह सेक्स टेप भंवरी देवी के इशारे पर ही बनवाए गए थे। वह इससे मदेरणा को ब्लैकमेल करना चाहती थी। बाद में भंवरी देवी की रहस्यमय तरीके से मौत हो गई। मदेरणा जेल में हैं।

पूर्व एयरहोस्टेस गीतिका शर्मा सुसाइड मामले के मुख्य आरोपी सिरसा के विधायक और हरियाणा सरकार में रहे मंत्री गोपाल कांडा का नाम सामने आया। खबरों के मुताबिक गीतिका का गोपाल कांडा से अंतरंग संबंध थे इसलिए वह शादी करना चाहती थी, लेकिन कांडा शादी के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं था।

साल 2012 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एनडी तिवारी को पितृत्वं केस में तगड़ा झटका लगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने डीएनए रिपोर्ट के आधार पर यह कहा है कि एन डी तिवारी ही रोहित शेखर के पिता हैं। डीएनए रिपोर्ट के मुताबिक एनडी तिवारी ही रोहित शेखर के जैविक पिता साबित हुए।

भाजपा के विधायक ध्रुव नारायण सिंह भी सामाजिक कार्यकर्ता दिवंगत शेहला मसूद सहित अन्य महिलाओं से अंतरंग संबंधों के कारण चर्चा में रहे हैं। पिछले दिनों भोपाल में राई नृत्य की आड़ में समाजवादी पार्टी के कुछ बड़े नेताओं ने नाबालिग लड़कियों से अश्लील डांस करवाया।

बिहार के पूर्णिया से भाजपा विधायक राजकिशोर केसरी की हत्या 4 जनवरी 2011 को शिक्षिका रूपम पाठक ने उनके आवास पर ही चाकू मारकर कर दी थी। इस मामले में भी सेक्स स्कैंडल ही सामने आया। पाठक ने कोर्ट में बताया कि राजकिशोर और उसके अंगरक्षकों की उसकी जवान बेटी पर बुरी निगाह थी जिसकी वजह से उसको यह कदम उठाना पड़ा था।

पिछले साल कांग्रेस के प्रवक्ताह अभिषेक मनु सिंघवी की सीडी इंटरनेट पर आई तो राजनीति में हड़कंप मच गया। सिंघवी की सीडी पर जमकर बवाल हुआ। सीडी में सिंघवी को कथित रूप से एक महिला के साथ दिखाया गया है। देश के तमाम बड़े टेलीविजन चैनलों पर अभिषेक मनु सिंघवी की कथित `सेक्स सीडी` बहस का मुद्दा बना। सीडी विवाद में फंसने के बाद सिंघवी ने कार्मिक, लोक शिकायत एवं कानून और न्याय मामलों की संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

कवयित्री मधुमिता शुक्ला और उत्तरप्रदेश के तत्कालीन मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के रिश्ते भी जगजाहिर हैं। मधुमिता की मई 2003 में उसके घर पर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पोस्टमार्टम हुआ तो चौंकाने वाली खबर सामने आई। मधुमिता गर्भवती थी। शक की सुई अमरमणि त्रिपाठी की ओर गई। हत्या के पीछे की वजह यह बताई गई कि मधुमिता अमरमणि से गर्भवती हो गई थी। फिलहाल अमरमणि जेल में हैं।

उत्तर प्रदेश के एक और तत्कालीन मंत्री आनंद सेन की जिंदगी में भी एक लड़की आई। वह लॉ की छात्रा शशि थी। शशि अपने ख्वाब को पूरा करने के लिए आनंद सेन के करीब आई। शशि विधायक बनाना चाहती थी। इसी मकसद से वह आनंद सेन के करीब आई। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती गईं, लेकिन 22 अक्टूबर 2007 को शशि गायब हुई। लंबी छानबीन और धड़पकड़ के बाद पता चला कि वह इस दुनिया से जा चुकी है। उसकी हत्या हो गई है।

सेक्स स्कैंडल में सिर्फ भारत के ही राजनेता नहीं फंसे हैं बल्कि दूसरे देशों के नेता भी इस गिरफ्त में आ चुके हैं। इसमें चीन के नेताओं से लेकर इटली के प्रधानमंत्री तक शर्मसार हो चुके हैं। चीन में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के एक नेता का सेक्स वीडियो सार्वजनिक होने के बाद काफी हो-हल्ला मचा। वीडियो में इस पदाधिकारी को एक महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया गया था। 20 नवंबर, 2012 को चीन का ट्विटर माने जाने वाले साइनो वीबो पर पोस्ट हुए सेक्स वीडियो ने चीन की राजनीति में भूचाल ला दिया था। लेई झेंगकेऊ को सेक्स स्कैंडल मामले में 13 साल की सजा सुनाई गई है। इस सेक्स वीडियो में शामिल नेता को वीडियो पोस्ट होने के 63 घंटे बाद ही अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति क्लिंटन 23 मई, 2012 को मोनाको में दो पोर्न स्टार्स के साथ तस्वीर खिंचवाते हुए दिखे, पोर्न स्टार ब्रूकलिन ली ने इस तस्वीर को ट्वीट किया था। इस तस्वीर में क्लिंटन के साथ पोर्न स्टार ताशा रेन एवं एक अन्य महिला शामिल थी। ट्विटर के जरिए इस तस्वीर के सार्वजनिक होने के बाद क्लिंटन को काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी। इससे पहले अपने शासनकाल में मोनिका लेवेंस्की के साथ सेक्स संबंधों का खुलासा होने के कारण भी क्लिंटन को काफी बदनामी हुई थी।

इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी की बुंगा बुंगा पार्टी की तस्वीरें सामने आने के बाद उनका राजनीतिक करियर चौपट हो गया। बर्लुस्कोनी पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने पैसे और ज्वैलरी के बदले 17 साल की डांसर करीमा अल माहरोग के साथ और सिर्फ दो महीने में 32 अन्य महिलाओं के साथ शारीरिक संबंध बनाए। बर्लुस्कोनी पर बुंगा बुंगा सेक्स पार्टी में पैसे देकर लड़कियों को नचाने के भी कई आरोप हैं।

देश हो या विदेश, राष्ट्रीय पार्टियां हो या प्रांतीय, सत्ता हासिल होते ही कुछ जनप्रतिनिधि जनसेवा की बात भूलकर अय्याशी में लिप्त हो जाते हैं और उसे प्राप्त करने के लिए सारे हथकंडे अपनाते हैं। इससे राजनीति और सरकार बदनाम होती है। साथ ही इन रहनुमाओं और राजनीति पर से जनता का भरोसा उठ जाता है।

`गांवों में 27 रुपये खर्च करने वाला व्‍यक्ति गरीब नहीं`


`गांवों में 27 रुपये खर्च करने वाला व्‍यक्ति गरीब नहीं`

Wednesday, July 24, 2013, 10:47`गांवों में 27 रुपये खर्च करने वाला व्‍यक्ति गरीब नहीं`नई दिल्ली : प्रति व्यक्ति खपत के आधार पर देश की आबादी में गरीबों का अनुपात 2011-12 में घटकर 21.9 प्रतिशत पर आ गया। यह 2004-05 में 37.2 प्रतिशत पर था। योजना आयोग ने एक प्रकार से अपने पूर्व के विवादास्पद गरीबी गणना के तरीके के आधार पर ही यह आंकड़ा निकाला है।

योजना आयोग के अनुसार, तेंदुलकर फार्मूला के तहत 2011-12 में ग्रामीण इलाकों में 816 रुपये प्रति व्‍यक्ति प्रति माह से कम उपभोग करने वाला व्यक्ति गरीबी की रेखा के नीचे था। शहरों में राष्ट्रीय गरीबी की रेखा का पैमाना 1,000 रुपये प्रति प्रति व्यक्ति प्रति माह का उपभोग है।

इसका मतलब है कि शहरों में प्रतिदिन वस्तु और सेवा पर 33.33 रुपये से अधिक खर्च करने वाला और ग्रामीण इलाकों में 27.20 रुपये खर्च करने वाला व्यक्ति गरीब नहीं है। इससे पहले आयोग ने कहा था कि शहरी इलाकों में प्रतिदिन 32 रुपये से अधिक खर्च करने वाला व्यक्ति गरीब नहीं है। उसकी इस गणना से काफी विवाद पैदा हुआ था। योजना आयोग ने आज जो गरीबी का आंकड़ा दिया है वह उसी गणना के तरीके पर आधारित है। इसमें कहा गया है कि पिछले सात साल में देश में गरीबों की संख्या घटी है।

आयोग ने कहा कि पांच व्यक्तियों के परिवार में खपत खर्च के हिसाब से अखिल भारतीय गरीबी की रेखा ग्रामीण इलाकों के लिए 4,080 रुपये मासिक और शहरों में 5,000 रुपये मासिक होगी। हालांकि, राज्य दर राज्य हिसाब से गरीबी की रेखा भिन्न होगी।

22.7.13

Dalay Hindi newspaper Mulnivasi Nayak










Mulnivasi Nayak











मर्द बनने की तरफ़ उठते जानलेवा कदम!

मर्द बनने की तरफ़ उठते जानलेवा कदम!

 मंगलवार, 23 जुलाई, 2013 को 07:37 IST तक के समाचार

खतना, अफ्रीका
दक्षिण अफ़्रीका में खतने की वजह से अब तक 79 किशोरों की मौत हो चुकी है. इन मौतों के बाद उन पारंपरिक सर्जनों पर शिकंजा कसने की मांग उठ रही है जो ये सर्जरी करते हैं.
क्लिक करें ख़तना कराने की मांग बढ़ने की वजह से गांव-देहातों में अवैध केंद्रों की बाढ़ आ गई है. कुछ किशोर अपने साथियों के दबाव के चलते घर से भाग जाते हैं या खुद अपना ख़तना कर लेते हैं.
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले छह साल में ख़तना कराने वाले ऐसे क़रीब 300 लोगों की मौत हो चुकी है. खतने की प्रक्रिया में अब तक 190 लोग नपुंसक हो चुके हैं और अधकचरे ऑपरेशनों के चलते क़रीब पांच हज़ार लोग अस्पतालों में भर्ती हैं.
हर साल क्लिक करें ज़ोसा और देबेले क़बीलों के किशोर पहाड़ी के उस पार उन पहाड़ों में पहुंचते हैं जहाँ उन्हें सिखाया जाता है कि वो कैसे एक ज़िम्मेदार पुरुष बन सकते हैं. यह एक तरह से मर्द बनने की तरफ़ उठते उनके शुरुआती कदम होते हैं.
ख़तना कराने की परंपरा दक्षिण अफ़्रीका के देहाती इलाक़ों में बेहद पवित्र मानी जाती है. ईस्टर्न केप में बिज़ाना के पहाड़ों के बीच इबोमा नाम की कुछ कामचलाऊ झोपड़ियां मौजूद हैं. इनमें कुछ लड़कों को दीक्षित किया जाता है और खतना इसी दीक्षा का एक हिस्सा है.

पारंपरिक सर्जन

"मेरा सपना रहा है कि मैं पति और तीन बच्चों का पिता बनूं. मगर अब ये कभी नहीं हो पाएगा. मैं अपना पुरुषत्व खो चुका हूं. कैसी ज़िंदगी होगी ये? क्या इसके बाद भी ज़िंदगी जीना मुमकिन है?"
खतने से चोटिल हुआ एक युवक
घबराए हुए ये सभी लड़के कंबल ओढ़ लेते हैं और इन्हें पूरे महीने चलने वाली दीक्षा के दौरान जूते पहनने की भी इजाज़त नहीं होती. महिलाओं को इन झोपड़ियों के अंदर जाने की मनाही है और बाहरी लोगों को दूर रहने का निर्देश दे दिया जाता है.
क्लिक करें जहाँ होता है सामूहिक खतना
किशोरों की देखभाल करने वालों को 'अमाखानकाथा' कहा जाता है जबकि पारंपरिक सर्जन को 'इंगसिबी'. ये लोग अपने गीत और नृत्य के ज़रिए नए लड़कों को अपनी परंपरा बरक़रार रखने और उसका सम्मान करने का संदेश देते हैं.
देश के इस हिस्से में कोई तब तक पुरुष नहीं माना जाता जब तक कि वह पहाड़ों में जाकर ख़तना नहीं करा लेता लेकिन वहाँ के अस्पतालों में खतने की इस प्रक्रिया के जानलेवा पहलुओं को भी देखा जा सकता है.
नेल्सन मंडेला अकेडमिक हॉस्पिटल में 36 नौजवान ख़तने के दौरान लगी गंभीर चोटों का इलाज करा रहे हैं. इनमें ज़्यादातर को अवैध तौर पर दीक्षा देने वाले स्कूलों से छुड़ाया गया है जहाँ वो मौत के क़रीब पहुंच चुके थे. कुछ तो अपने गुप्तांग तक खो चुके हैं.
यहाँ इलाज करा रहा एक युवक कहता है, "मेरा सपना रहा है कि मैं पति और तीन बच्चों का पिता बनूं. मगर अब ये कभी नहीं हो पाएगा. मैं अपना पुरुषत्व खो चुका हूं. कैसी ज़िंदगी होगी ये? क्या इसके बाद भी ज़िंदगी जीना मुमकिन है?"

खुदकुशी

अफ्रीका, खतना
टूटी हुई बोतलें, जूतों के फीते और जले हुए सामान वो चीज़ें हैं, जिनका इस्तेमाल पारंपरिक सर्जन ख़तना करने के दौरान करते हैं. इसके चलते किशोरों के गुप्तांगों को इतना नुकसान हो जाता है कि उसकी कभी भरपाई नहीं हो सकती.
खतने के दौरान लड़कों को आने वाली चोटों का इलाज कर रहे डॉक्टर बुईसेलो मादीबा कहते हैं, "अगर हालात बेहद ख़राब हुए तो लड़के अपना पुरुषत्व गंवा बैठते हैं और फिर वो काम करने लगते हैं जो समुदाय को मंज़ूर नहीं. या इनमें से कई ख़ुदकुशी कर लेते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि जीने की अब कोई वजह नहीं रह गई है."
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कुछ किशोरों ने भागने की कोशिश भी की. 17 साल के एक लड़के को इस अपराध की वजह से पेड़ से बांध दिया गया था. जब उसने पानी मांगा, तो उसे पीटा भी गया.
उस लड़के ने आपबीती सुनाते हुए कहा, "मैंने उनसे कहा था कि मैं प्यासा हूं. कई बार बेहोश हो चुका था और काफ़ी कमज़ोर भी था. मगर उन्होंने मुझे चम्मचों में भरकर कीचड़ दे दिया और जब मैंने इसका विरोध किया तो उन्होंने मुझ पर हमला बोल दिया. बेहद भयानक था ये. मैं रीति-रिवाज़ों तो मानता हूं लेकिन हर चीज़ में यक़ीन करने को तैयार नहीं."

सर्जिकल औज़ार

"इस हादसे ने मेरे परिवार को तोड़ दिया है. मुझे पता नहीं कि तब मैं क्या करूंगी जब मेरा छोटा बेटा दीक्षा के लिए जाएगा. मैं एक और बच्चे को नहीं खोना चाहती."
नोबुंतू म्पांडे, घर से भागे किशोर की माँ
थाथा की पहा़ड़ियों में एक बार फिर चलते हैं. हमारे सामने लंबे पाजामे और लंबी बांह वाली शर्ट पहले कई लड़के हैं, जिन्होंने कंधों पर कंबल डाल रखे हैं. इन्हें अभी-अभी दीक्षा मिली है. नंगे पैर ये किशोर ज़ोसा संस्कृति की तारीफ़ में गीत गा रहे हैं. इसके बाद उन्हें स्थानीय प्रमुख के सामने पेश होना है.
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स्थानीय सर्जन सियाबोंगा राली के मुताबिक़ उन्हें स्वास्थ्य विभाग ने बाक़ायदा ट्रेनिंग दी है और उन्होंने इस सीज़न में अब तक सौ से ज़्यादा लड़कों का ख़तना किया है. मगर किसी को कोई तकलीफ़ नहीं हुई.
सियाबोंगा राली बताते हैं, "हर लड़के के लिए अलग सर्जिकल औज़ार का इस्तेमाल होता है. आजकल कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं. मैं किशोरों की देखभाल करता हूं, इसलिए मैं कोई ख़तरा मोल नहीं लेना चाहता. जो क़ानून तोड़ रहे हैं वो हमारी परंपरा तोड़ रहे हैं और उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए."

पुरानी प्रथाएँ

अफ्रीका, खतना
एक परिवार के दो बेटे अपने दोस्तों के साथ दीक्षा लेने के लिए घर से भाग गए थे. उनमें अब एक की मौत हो चुकी है. दोनों ने घरवालों को कुछ नहीं बताया था और वो अप्रशिक्षित सर्जनों के हत्थे चढ़ गए.
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लड़कों की मां नोबुंतू म्पांडे फूट फूट कर रोते हए बताती हैं कि दोनों लड़के इसलिए घर से भागे थे क्योंकि उन पर अपने साथियों का दबाव था.
नोबुंतू म्पांडे कहती हैं, "इस हादसे ने मेरे परिवार को तोड़ दिया है. मुझे पता नहीं कि तब मैं क्या करूंगी जब मेरा छोटा बेटा दीक्षा के लिए जाएगा. मैं एक और बच्चे को नहीं खोना चाहती."
कई समुदाय पुरानी प्रथाओं की जकड़न में हैं हालांकि अब पूरे दक्षिण अफ़्रीका में मांग उठ रही है कि परंपरा के नाम पर किसी की मौत नहीं होनी चाहिए.

जब एक महिला ने आजाद से छीन ली थी पिस्तौल तब..

जब एक महिला ने आजाद से छीन ली थी पिस्तौल तब..

Updated on: Tue, 23 Jul 2013 10:27 AM (IST)
chandrashekhar azad
जब एक महिला ने आजाद से छीन ली थी पिस्तौल तब..
नई दिल्ली। पंडित चंद्रशेखर आजाद का जन्म भावरा गांव [अलीराजपुर जिला] में 23 जुलाई 1906 को हुआ था। उनके पूर्वज बदरका [वर्तमान उन्नाव जिला] से थे । आजाद के पिता पंडित सीताराम तिवारी मध्यप्रदेश के अलीराज रियासत में नौकरी करते थे और फिर वे वहीं भावरा गांव में बस गए। चंद्रशेखर के माताजी का नाम जगरानी देवी था।
आजाद का प्रारंभिक जीवन आदिवासी इलाके में बीता था इसलिए वे बहुत कम समय निशानेबाजी कला में पारंगत हो गए थे। बालक चंद्रशेखर आजाद का मन अब देश को आजाद कराने के अहिंसात्मक उपायों से हटकर सशस्त्र क्रांति की ओर मुड़ गया। उस समय बनारस क्रांतिकारियों का गढ़ था। वे मंमथनाथ गुप्त और प्रणवेश चटर्जी के संपर्क में आये और क्रांतिकारी दल के सदस्य बन गये। क्रांतिकारियों का वह दल हिन्दुस्तान प्रजातन्त्र संघ के नाम से जाना जाता था।
भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के अत्यन्त सम्मानित और लोकप्रिय स्वतंत्रता सेनानी के रूप चंद्रशेखर आजाद को जाना जाता है। वे पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल व सरदार भगत सिंह सरीखे महान क्रांतिकारियों के अनन्यतम साथियों में से थे। गांधीजी द्वारा असहयोग आंदोलन को अचानक बंद कर देने के कारण उनकी विचारधारा में बदलाव आया और वे क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़ कर हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसियेशन के सक्रिय सदस्य बन गये। इस संस्था के माध्यम से उन्होंने राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में पहले काकोरी कांड किया और फरार हो गये। इसके बाद बिस्मिल के साथ उन्होंने उत्तर भारत की सभी क्रांतिकारी पार्टियों को मिलाकर एक करते हुए हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन ऐसोसियेशन का गठन किया तथा भगत सिंह के साथ लाहौर में लाला लाजपत राय की मौत का बदला सॉण्डर्स का वध करके लिया और दिल्ली पहुंच कर असेम्बली बम कांड को अंजाम दिया।
1919 में अमृतसर के जलियांवाला बाग नरसंहार ने देश के नवयुवकों को उद्वेलित कर दिया। चंद्रशेखर उस समय पढाई कर रहे थे। तभी से उनके मन में एक आग धधक रही थी। जब गांधीजी ने असहयोग आंदोलन का फरमान जारी किया तो वह आग ज्वालामुखी बनकर फट पडी और तमाम अन्य छात्रों की भांति चंद्रशेखर भी सड़कों पर उतर आये। अपने विद्यालय के छात्रों के जत्थे के साथ इस आन्दोलन में भाग लेने पर वे पहली बार गिरफ्तार हुए और उन्हें बेतों की सजा मिली।
असहयोग आंदोलन के दौरान जब चौरी चौरा की घटना के पश्चात बिना किसी से पूछे गांधीजी ने आंदोलन वापस ले लिया तो देश के तमाम नवयुवकों की तरह आजाद का भी कांग्रेस से मोह भंग हो गया और पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, शचीन्द्रनाथ सान्याल योगेशचन्द्र चटर्जी ने उत्तर भारत के क्रांतिकारियों को लेकर एक दल हिन्दुस्तानी प्रजातांत्रिक संघ [एच0 आर0 ए0] का गठन किया। चंद्रशेखर आज़ाद भी इस दल में शामिल हो गये। इस संगठन ने जब गांव के अमीर घरों में डकैतियां डालीं, ताकि दल के लिए धन जुटाने की व्यवस्था हो सके तो यह तय किया गया कि किसी भी औरत के उपर हाथ नहीं उठाया जाएगा। एक गांव में राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में डाली गई डकैती में जब एक औरत ने आजाद का पिस्तौल छीन लिया तो अपने बलशाली शरीर के बावजूद आजाद ने अपने उसूलों के कारण उस पर हाथ नहीं उठाया। इस डकैती में क्रांतिकारी दल के आठ सदस्यों पर, जिसमें आज़ाद और बिस्मिल भी शामिल थे, पूरे गांव ने हमला कर दिया। बिस्मिल ने मकान के अन्दर घुसकर उस औरत को कसकर चांटा मारा, पिस्तौल वापस छीनी और आजाद को डांटते हुए खींचकर बाहर लाये। इसके बाद दल ने केवल सरकारी प्रतिष्ठानों को ही लूटने का फैसला किया। अपने पक्के उसूलों के कारण आजाद भारत माता की सेवा में 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में शहीद हो गए।