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युवक ने बुद्धिमानी के बल पर पाई राजा की कृपा

Source: Bhaskar news   |   Last Updated 01:22(31/05/12)
 
 
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जीवन दर्शन.. एक राजा कुशल प्रशासक था। प्रजा के सुख-दुख जानने के लिए वह प्राय: साधारण वेशभूषा में उनके बीच घूमा करता था। एक दिन जब वह नगर भ्रमण कर रहा था तो कुछ घुड़सवार अपनी ओर बढ़ते देखे। राजा समझ गया कि वे लुटेरे हैं और उन्हें लूटने की नीयत से आ रहे हैं। राजा साहसी था, अत: घबराने के बजाय उनसे लड़ने के लिए तैयार हो गया। उसी समय अचानक राजा के घोड़े का पैर एक गड्ढे में फंस गया।


घोड़ा एक कदम भी हिल-डुल नहीं पा रहा था। उधर लुटेरे बढ़ते चले आ रहे थे। तभी कुछ नवयुवक वहां आए। वे स्थिति की गंभीरता को समझ गए और उन्होंने लुटेरों पर हमला कर उन्हें भगा दिया। राजा ने अपना असली परिचय देते हुए उनमें से हर एक युवक को अपनी इच्छित वस्तु मांगने के लिए कहा।


एक युवक ने धन मांगा, दूसरे ने मकान। तीसरे को सभासद पद चाहिए था, तो चौथे को खेत। पांचवें ने अपने गांव तक सड़क बनवाने की मांग की और छठे ने कहा कि राजा वर्ष में दो बार मेरे घर में मेहमान बनें।

राजा पांचों की इच्छा पूर्ण करने के बाद छठे के घर मेहमान बनकर आया तो उसे जर्जर घर में रहना पड़ा और जमीन पर सोना पड़ा। तब राजा ने उसे एक शानदार मकान बनवा दिया और राजा के प्रत्येक आगमन पर उसे कुछ न कुछ सौगात मिलती रही।


अपनी बुद्धिमानी से इस युवक ने राजा का आतिथ्य मांगकर स्वयं का जीवन सदा के लिए खुशहाल बना लिया। सार यह है कि यथोचित लाभ पाने के लिए अवसरों का उपयोग बुद्धिमत्तापूर्ण ढंग से करना चाहिए।

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