31.7.12

तीन मीटर लंबा, आधा टन वज़न वाला परिंदा !

 बुधवार, 1 अगस्त, 2012 को 04:09 IST तक के समाचार
फाइल फोटो
माना जाता है कि लाखों वर्ष पहले बड़े भयानक सूखे की वजह से तमाम विशालकाय जीव मारे गए थे
ऑस्ट्रेलिया में वैज्ञानिकों ने एक विशाल पंजा और एक बड़े पक्षी के अवशेष खोज निकाले हैं. ये पंजा रेंगने वाले किसी प्राचीन जीव का हो सकता है.
ये अवशेष एलिस स्प्रिंग्स के नज़दीक़ मिले हैं जो ऑस्ट्रेलिया की वो जगह है जहां बड़े-बड़े जीवाश्म मिलते रहे हैं.
वर्ष 1985 से ही शोधकर्ता यहां उन विशालकाय स्तनधारी जीवों के अवशेष खोजने के लिए आते रहे हैं जो यहां लगभग अस्सी लाख वर्ष पहले रहते थे.
इस जगह का नाम एल्कोटा साइंटिफिक रिज़र्व है जो एलिस स्प्रिंग्स से 160 किलोमीटर दूर स्थित है. यहां सबसे पहले 1950 के दशक में एक प्राचीन मगरमच्छ के दांत मिले थे. तभी से यहां प्रागैतिहासिक काल के जीवों के अवशेष मिलते रहे हैं.

आधे टन का पक्षी

हाल ही में यहां एक विशाल पक्षी की पिंडली की हड्डी लाल बालू में दबी मिली है. जीवाश्म-विज्ञानियों का मानना है कि ये पक्षी इतना विशाल था कि उड़ नहीं सकता था.
उनका मानना है कि इसकी लंबाई तीन मीटर से ज़्यादा और वज़न आधा टन यानी 500 किलो रहा होगा.
सेंट्रल ऑस्ट्रेलिया म्यूजियम के डॉक्टर एडम यट्स कहते हैं कि यहां और भी कुछ मिला है जो कहीं ज़्यादा रहस्यमयी खोज है.
वे कहते हैं कि यहां एक विशाल पंजा मिला है जो जिसके नाख़ून बेहद पैने हैं, अभी ये पता नहीं चल पाया है कि ये विशाल पंजा आख़िर किस जीव का है.
हालांकि इससे मिलते-जुलते पंजे पहले भी मिले हैं जिनके बारे में माना जाता है कि ये विशाल स्तनधारी गोआना का पंजा होगा.
डॉक्टर एडम यट्स ये भी कहते हैं कि अभी तक कोई दूसरी हड्डी नहीं मिली है जिसका आकार गोआना से मेल खाता हो.
माना जाता है कि लाखों वर्ष पहले बड़े भयानक सूखे की वजह से ये तमाम विशालकाय जीव मारे गए थे.
ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों का कहना है कि धरती को बचाने के लिए इंसान के लिए ये एक चेतावनी की तरह है.

ऑस्ट्रिया में मिली सबसे पुरानी ब्रा

 बुधवार, 1 अगस्त, 2012 को 08:18 IST तक के समाचार

सदियों पुरानी ये बिकिनी आज की बिकिनी से ज्यादा अलग नहीं दिखती है.
ऑस्ट्रिया के शहर निकोल्सडोर्फ में एक मध्य युगीन किले से कई नायाब चीजें मिली हैं. इनमें से सबसे ज्यादा दिलचस्पी उन महिला अंडरवियर्स को लेकर है जिन्हें दुनिया की सबसे पुरानी ब्रा बताया जा रहा है.
पुरातत्वविदों का मानना है कि जो चार महिला अंडरवियर किले से उन्हें मिले हैं, वो 15वीं सदी के मध्य के हो सकते हैं.
अहम बात ये है कि इन कपड़ों के मिलने के बाद ये आम धारणा बदल सकती है कि महिलाओं में ब्रा पहनने का चलन 18वीं सदी के आस-पास शुरू हुआ था.
"जहां तक हमें जानकारी है, ये सबसे पुराने महिला अंतः वस्त्र हैं. हम ये नहीं जानते कि कहां कब क्या मिल जाए. लेकिन अभी तक तो कोई व्यक्ति सामने नहीं आया जिसके पास इससे ज्यादा पुराने इस तरह के वस्त्र हों."
बिट्रिक्स नुत्ज, पुरातत्वविद
मध्ययुगीन किले से मिले चार महिला अंतःवस्त्रों में से दो आज के दौर की बिकनी जैसे ही हैं.

पुराने दौर की झलक

पुरातत्वविद बिट्रिक्स नुत्ज का कहना है, “जहां तक हमें जानकारी है, ये सबसे पुराने महिला अंतःवस्त्र हैं. हम ये नहीं जानते कि कहां कब क्या मिल जाए. लेकिन अभी तक तो कोई व्यक्ति सामने नहीं आया जिसके पास इससे ज्यादा पुराने इस तरह के वस्त्र हों.”
वैसे पुरातत्वविदों को ये चीजें महज संयोग से ही मिली हैं. जब मरम्मत के दौरान किले के खराब हो चुके लकड़ी के फर्श को हटाया गया तो उन्हें वहां से लगभग दो हजार सात सौ चीजें मिलीं.
इनमें कपड़ों के टुकड़े, औजार और वाद्य यंत्रों के साथ-साथ ताश के पत्ते भी मिले.
नुत्ज कहती हैं, “जो कपड़े मिले हैं, वे सभी 15वीं सदी के हैं. रोजमर्रा के इस्तेमाल के कपड़ों को अकसर फेंक दिया जाता है. ऐसे पूरे कपड़े मिलना मुश्किल है. खुदाई में आपको कुछ ही हिस्सा मिल पाता है. लेकिन इससे पुराने जमाने की झलक तो मिलती ही है.”

फोर्ब्स की लिस्ट में टॉप 10 में 6 इंडियन क्रिकेटर्स

31 Jul 2012, 2002 hrs IST,भाषा  

dhoni with sachin
एम.एस.धोनी के साथ सचिन तेंडुलकर।
नई दिल्ली।। क्रिकेट की दुनिया में 'महाशक्ति' का दर्जा रखने वाले भारत के छह खिलाड़ियों को अमेरिका की बिजनेस मैगजीन 'फोर्ब्स' ने दुनिया के 10 सर्वाधिक कमाई करने वाले क्रिकेट खिलाड़ियों की लिस्ट में शामिल किया है। खास बात यह कि सचिन तेंडुलकर कमाई में धोनी से पीछे पड़ गए हैं। उनके पिछड़ने की वजह बना है उन्हीं का एक नेक फैसला। गौरतलब है कि 2010 में सचिन ने विजय माल्या के यूबी ग्रुप की एक बड़ी डील ठुकरा दी थी।

पढ़ें: सचिन क्यों ठुकराते हैं शरा ब का ऐड

क्रिकेट में भारत की 'ताकत' का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि फोर्ब्स द्वारा जारी 10 सर्वाधिक कमाई करने वाले क्रिकेट खिलाड़ियों की सूची में शीर्ष पांच स्थानों पर भारतीय खिलाड़ियों का कब्जा है जबकि चार ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी भी इस लिस्ट में अपना स्थान बनाने में सफल रहे हैं।

इस लिस्ट में पहले स्थान पर 'कैप्टन कूल' के नाम से मशहूर टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी हैं जिनकी पिछले साल की कुल कमाई दो करोड़ 65 लाख डॉलर (147 करोड़ रुपये से अधिक) रही।

धोनी ने क्रिकेट से कमाए 20 करोड़, ऐड से सवा सौ करोड़
धोनी को जहां 35 लाख डॉलर (करीब 19 करोड़ 47 लाख रुपये) क्रिकेट खेलकर मिले वहीं ऐड करके उन्होंने दो करोड़ 30 लाख डॉलर (127 करोड़ रुपये से अधिक) की कमाई की। आईपीएल में चेन्नै सुपर किंग के कप्तान धोनी रिबॉक, पेप्सीको, सोनी जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए प्रचार करते हैं। धोनी विज्ञापन के जरिये कमाई करने के मामले में सबसे आगे हैं।

मैगजीन के मुताबिक कमाई के मामले में 'रेकॉर्डों के शहंशाह' सचिन तेंडुलकर दूसरे नंबर पर हैं। 'मास्टर ब्लास्टर' ने पिछले एक साल में एक करोड़ 86 लाख डॉलर (103 करोड़ रुपये) की कमाई की। तेंडुलकर को क्रिकेट से जहां 21 लाख डॉलर (11 करोड़ 68 लाख रुपये) मिले वहीं ऐड के जरिये उन्होंने एक करोड़ 65 लाख डॉलर (लगभग 92 करोड़ रुपये) की कमाई की। 'शतकों का शतक' ठोकने वाले तेंडुलकर आडीडास, कोका कोला और कैस्ट्रॉल जैसी कंपनियों के लिए प्रचार करते हैं।

क्रिकेट से कमाई में नंबर 1 हैं गंभीर
इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर टीम इंडिया के भरोसेमंद बल्लेबाज गौतम गंभीर हैं। आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए खेलने वाले गंभीर ने पिछले एक साल में 73 लाख डॉलर (40 करोड़ 61 लाख रुपये) की कमाई की। इस कमाई में से गंभीर को 39 लाख डॉलर (21 करोड़ 69 लाख) क्रिकेट खेलकर मिले वहीं विज्ञापनों के जरिये उन्होंने 34 लाख डॉलर (लगभग 19 करोड़ रुपये) कमाए। गंभीर रिबाक, रेड बुल और हीरो होंडा के लिए प्रचार करते हैं। इस तरह क्रिकेट खेलकर कमाई करने के मामले में गंभीर ने धोनी को पीछे छोड़ दिया है।

फोर्ब्स ने सर्वाधिक कमाई करने वाले क्रिकेटरों में टीम इंडिया के उप कप्तान विराट कोहली को चौथे नंबर पर रखा गया है। कोहली ने पिछले साल 71 लाख डॉलर (39 करोड़ 50 लाख रुपये) की कमाई की। कोहली को क्रिकेट खेलकर 31 लाख डॉलर (17 करोड़ 25 लाख रुपये) मिले जबकि ऐडवर्टाइज़मेंट्स से उन्हें 40 लाख डॉलर (22 करोड 26 लाख रुपये) की आमदनी हुई।

भारतीय क्रिकेट टीम के विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग कमाई के मामले में पांचवे नंबर पर रहे। उन्होंने पिछले एक साल में 69 लाख डॉलर (38 करोड़ 40 लाख रुपये) की कमाई की। इसमें से 28 लाख डॉलर (15 करोड़ 40 लाख रुपये) क्रिकेट खेलकर जबकि 41 लाख डालर (22 करोड़ 81 लाख रुपये) ऐडवर्टाइज़मेंट्स से मिले। सहवाग फिला, हीरो होंडा, रॉयल चैलेंज के लिए प्रचार करते हैं।

ऑस्टेलियाई खिलाड़ी शेन वाट्सन सर्वाधिक कमाई करने वाले क्रिकेटरों में छठे नंबर पर हैं और उन्होंने पिछले साल 59 लाख डॉलर (32 करोड़ 84 लाख रुपये) की कमाई की। लिस्ट में ऑस्ट्रेलिया की क्रिकेट टीम के कप्तान माइकल क्लार्क सातवें (49 लाख डॉलर या 27 करोड 27 लाख रुपये), ऑस्ट्रेलिया के ही तूफानी गेंदबाज ब्रेट ली आठवें (48 लाख डॉलर या 26 करोड़ 71 लाख रुपये) पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग नौंवे (41 लाख डॉलर या 22 करोड़ 82 लाख रुपये) और अपने ताबड़तोड़ छक्कों और चौकों के लिये मशहूर भारतीय क्रिकेट स्टार यूसुफ पठान 10वें नंबर (37 लाख डॉलर या 20 करोड़ 59 लाख रुपये) पर हैं।

फोर्ब्स ने माही के बारे में लिखा, 'महेंद्र सिंह धोनी अपने हेयरस्टाइल, तेज रफ्तार बाइक्स और आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। कैप्टन कूल के नाम से जाने चर्चित माही के नेतृत्व में टीम ने दबाव में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कई बार सफलता हासिल की है। माही के नेतृत्व में टीम इंडिया ने पिछले साल फरवरी में वर्ल्ड कप जीता। उनकी इस सफलता ने उन्हें भारत का सबसे बड़ा सिलेब्रेटी बना दिया।'

इसलिए धोनी से पीछे पड़े तेंडुलकर
तेंडुलकर के बारे में मैगजीन ने लिखा, 'तेंडुलकर ने भले ही 100वीं सेंचुरी लगाई हो लेकिन भविष्य में उनके कमाई सीमित रहेगी। 'लिट्ल मास्टर' के नाम से मशहूर तेंडुलकर, धोनी से पहले सर्वाधिक कमाई करने वाले क्रिकेटर थे।' मैगजीन के मुताबिक तेंडुलकर की कम कमाई की वजह शराब है। धोनी शराब के विज्ञापन से बहुत कमाते हैं जबकि तेंडुलकर शराब का विज्ञापन नहीं करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि शराब का ऐडवर्टाइज़मेंट नहीं करने के फैसले का उनकी कमाई पर असर पड़ा है। इसके अलावा एक और वजह यह है कि आईपीएल के दौरान 10 मैचों में नहीं खेलने से भी उनकी कमाई में कम हुई।

इतनी तेज़ तैराक!

 सोमवार, 30 जुलाई, 2012 को 21:42 IST तक के समाचार
    चीन की 16 वर्षीया तैराक ये शिवेन इतना तेज़ तैरीं कि सब हैरान रह गए हैं. 400मीटर मेडले के आखिरी 50मीटर की दूरी उन्होंने मात्र 28.93 सेकंड में पूरी कर ली.
    इतनी तेज़ी से तो पुरूषों के स्वर्ण पदक विजेता अमरीकी तैराक रायन लोटे भी नहीं तैरे जिन्होंने इसके लिए 29.10 सेकंड लिए.
    ये शिवेन की गति देख बीबीसी कमेंटेटर क्लेयर बाल्डिंग भी दंग रह गईं और उनके मुँह से निकल पड़ा – मार्क, कोई यदि अचानक इतनी तेजी से तैर जाए तो फिर पता नहीं कितने सवाल पूछे जाएँगे?
    विशेषज्ञ और पूर्व ब्रिटिश ओलंपियन मार्क फ़ोस्टर से पूछा गया ये सवाल संवेदनशील था क्योंकि पहले चीन के कुछ तैराक ड्रग स्कैंडल में फँस चुके हैं, पिछले महीने एक महिला विश्व चैंपियन पोज़िटिव भी पाई गई थीं.
    मगर मार्क ने बात संभाल ली, वो बोले – ये शिवेन 16 साल की हैं, उनकी उम्र को देखा जाए तो उन्होंने जो किया वो बिल्कुल संभव है.

    गिनती ने गड़बड़ाया


    खलील अल माओइ को लगा वो जीत गए हैं
    ट्यूनीशिया लंदन ओलंपिक में अपना पहला मेडल जीतते-जीतते रह गया, और ये हुआ एक कोच की कमज़ोर गिनती के कारण.
    मुक़ाबला 56 किलोग्राम वर्ग में भारोत्तोलन का था. ट्यूनीशियाई खिलाड़ी खलील अल माओइ ने वज़न उठाया. वे दूसरे नंबर पर थे. उन्हें लगा कि उन्होंने 158 किलो वज़न उठाया है. और उन्हें लगा वो जीत गए.
    फिर दूसरे दौर के लिए वो वज़न उठाने आए ही नहीं.
    बाद में पता चला जो वज़न उन्होंने उठाया था वो 10 किलो कम यानी केवल 148 किलोग्राम था और कोच ने लिखवाया 158.
    माओइ अब कोच को कोस रहे हैं कि उनकी ग़लत गिनती ने सब गुड़गोबर कर दिया.

    टूटी पटवार, टूटा सपना


    पतवार टूटने के समय टीम तीसरे नंबर पर थी
    नौकायन प्रतियोगिता में न्यूज़ीलैंड की महिला टीम तेज़ी से आगे बढ़ रही थी जब उनके सपनों पर पानी फिर गया.
    1500 मीटर की दूरी पर अंतिम नंबर पर रहनेवाली चार खिलाड़ियों की टीम आहिस्ता-आहिस्ता दूसरी टीमों को पीछे छोड़ आगे निकल रही थी.
    फ़ाइनल में पहुँचने के लिए अंतिम चार में रहना ज़रूरी था, वो तीसरे नंबर पर थीं, जब अचानक एक खिलाड़ी की पतवार पानी के भीतर फँस गई और फिर टूट गई.
    इसके बाद बेबस खिलाड़ी केवल दूसरी नौकाओं को आगे निकलता देखती रहीं. उन्होंने रेस पूरी की, मगर उनकी नाव फ़िनिशिंग लाइन को पार करनेवाली अंतिम नाव रही.

    लौट के बुद्धू...

    टेक्नोलॉजी बड़ी तेज़ी से आगे बढ़ती जा रही है, ऐसी-ऐसी चीज़ें साकार होने लगी हैं जो कल तक सपना लगती थीं.
    तो लंदन ओलंपिक के कुछ आयोजकों ने एक सपना देखा – कि ये ओलंपिक ऐसा हो जो कैशलेस ओलंपिक हो. यानी कहीं भी किसी को नकद रूपया-चिल्लर निकालने की ज़रूरत नहीं पड़े.
    डेबिट-क्रेडिट कार्ड तो हैं ही, ओलंपिक आयोजक अमरीकी कंपनी वीज़ा ने यहाँ सैम्संग गैलेक्सी मोबाइल फ़ोन पर फ़ोन से ही पेमेंट करने की एक सुविधा जारी कर दी.
    मगर वेम्ब्ली स्टेडियम में ब्रिटेन और सउदी अरब के मैच के दौरान ये सारी योजना धरी की धरी रह गई, कुछ तकनीकी कारण से वीज़ा के कार्डों ने काम करना बंद कर दिया.
    बस फिर क्या था, जिनके पास पाउंड-पेन्स थे, वो खाना-पीना खरीद सके, बाकी एटीएम मशीन का रास्ता पूछते रहे.

    गूगल ज्ञानी


    उदघाटन समारोह में टिम बर्नर्स ली
    अमरीकी ब्रॉडकास्टर एनबीसी बहुत ज़ोर-शोर से लंदन ओलंपिक कवर करने पर पहुँचा है, मगर उनकी शुरूआत अच्छी नहीं रही.
    एक तो ओपनिंग समारोह को लाइव के बदले कुछ देर से दिखाने को लेकर उनकी आलोचना हो रही है. दूसरा कारनामा उनके कमेंटेटरों ने किया.
    ओपनिंग समारोह की एक ख़ास घड़ी थी, वर्ल्ड वाइड वेब का आविष्कार करनेवाले ब्रिटेन के वैज्ञानिक सर टिम बर्नर्स ली को स्टेडियम में बुलाया जाना.
    टिम ने स्टेडियम से ही दुनिया को ट्वीट किया – दिस इज़ फ़ॉर एवरीवन.
    और एनबीसी के कमेंटेटर बोले – हू इज़ ही? बल्कि एक ने तो लोगों को टिम के बारे में जानने के लिए गूगल करने के लिए भी कहा.
    और टेक्नोलॉजी की समझ रखनेवालों ने उनकी इस बात को सुन केवल सिर हिलाया.
    गूगल करना ही असंभव होता, यदि टिम बर्नर्स ली ने वेब का आविष्कार नहीं

    पिछड़ेपन की स्याह तस्वीर

    Updated on: Fri, 27 Jul 2012 03:01 PM (IST)
    अरबों रुपये का सर्वशिक्षा अभियान, प्रदेश को एजुकेशन हब बनाने का संकल्प, सौ करोड़ का ड्यूल डेस्क आपूर्ति का ऑर्डर, 25 हजार अध्यापकों की भर्ती की घोषणा, एजुसेट, हर सरकारी स्कूल का अपना भवन होने का लक्ष्य, मिड डे मील, हर स्कूल में प्रयोगशाला, हर विद्यालय में कंप्यूटर लैब व जनरेटर सेट का महत्वाकाक्षी प्रोजेक्ट. ये सारी योजनाएं यमुनानगर के पोबारी गाव को चिढ़ाती प्रतीत हो रही हैं। दुर्भाग्य की बात है कि इस मध्यम दर्जे के इस गाव में एक भी साक्षर नहीं, बच्चों ने स्कूल का मुंह नहीं देखा क्योंकि स्कूल है ही नहीं। आखिर शिक्षा विभाग किस आधार पर राज्य को सौ फीसद साक्षर बनाने के सपने देख रहा है? गहनता से सर्वेक्षण किया जाए तो पोबारी से मिलते-जुलते कई गाव और मिल सकते हैं। 10 से 15 फीसद साक्षरता वाले दर्जनों गाव अकेले मेवात जिले में हैं। योजनाओं की बहुतायत में क्त्रियान्वयन कहीं दूर जा छिटका दिखाई दे रहा है। इसमें कोई संदेह नहीं कि राज्य सरकार ने शिक्षा क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और संसाधन उपलब्ध करवाने में कभी कंजूसी नहीं दिखाई परंतु उसे यह भी गंभीरता से आकलन करना चाहिए कि उद्देश्य की पूर्ति के लिए धरातल पर कितना काम हुआ। संसाधन झोंक कर इंफ्रास्ट्रक्चर की सिर्फ नींव तैयार करना ही क्या मूल उद्देश्य है? उस नींव पर ऊंचे भवन खड़े करने के लिए क्या कोई और आएगा? पोबारी गाव में आज तक स्कूल क्यों नहीं खुला? वोटर लिस्ट, स्वास्थ्य अभियान तथा जनसंख्या सर्वेक्षण के दौरान किसी सरकारी विभाग की नजर में यह गाव क्यों नहीं आया? गाव में सड़क तो दूर, गली तक नहीं, आवागमन के साधन नहीं, स्वास्थ्य सेवा तो दूर, मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई जा रहीं। सरकार गंभीरता से विचार करे कि इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है? पूरे प्रदेश में विशेष अभियान चला कर ऐसे अन्य गावों की तत्काल पहचान होनी चाहिए। सर्वशिक्षा अभियान के लिए आए धन का सभी जिलों और गावों में समान उपयोग होना चाहिए। व्यावहारिकता की पहचान के बाद ही योजनाएं लागू हों। योजना निर्माण और अमल के बीच जितनी विसंगति, जितना अंतर होगा, सरकार की दक्षता पर उतने ही प्रश्नचिह्न चस्पा होंगे। पोबारी में शिक्षा, स्वास्थ्य, जनसुविधाएं, बिजली-पानी के लिए दीर्घकालिक योजना बनाने में विलंब नहीं होना चाहिए। सबसे तेज गति से विकसित हो रहे राज्य में सरकार की छवि और साख पर पोबारी की वजह से बट्टा न लग जाए, इसके लिए समग्र प्रयास किए जाएं।

    विषाक्त भोजन खाने से दो बच्चों की मौत 400 से अधिक बीमार

     



    कोलकाता: उत्तरी 24 परगना जिले में एक इफ्तार पार्टी में भोजन के बाद दो बच्चों की मौत हो गई जबकि 400 से अधिक को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।

    स्वास्थ्य राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने मंगलवार को बताया कि 435 बीमार लोगों में से पांच की हालत गंभीर है जो बेलियाघाट स्थित आईडी अस्पताल में भर्ती हैं।

    उन्होंने बताया कि उत्तरी 24 परगना जिले के उत्तरी दमदम स्थित बांकडा इलाके में इफ्तार पार्टी के लिये एक साझा रसोई में बनी ‘घुगनी ’ (मटर से बनने वाला व्यंजन) खाने से काफी लोग बीमार पड़ गये।

    सभी को आईडी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां दो बच्चों की मौत हो गई। मंत्री ने बताया कि एक चिकित्सा दल बांकडा भेजा गया है और वह खुद भी इलाके में जा रही हैं।

    शहरी विकास का खाका

    Updated on: Sun, 29 Jul 2012 06:19 AM (IST)
    गांवों का विकास हालांकि हर किसी के एजेंडे में है, लेकिन मुखौटे तो शहर ही होते हैं। इसलिए इनके विकास का मायने कुछ दूसरा है, जिस पर राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक हाल के वर्षो में कुछ ज्यादा ही माथापच्ची करने लगी है। यही कारण है कि 12वीं पंचवर्षीय योजना में राज्य के शहरों के विकास के लिए भारी-भरकम राशि 6,729 करोड़ रुपये का लक्ष्य लेकर चला जा रहा है। विधानसभा भवन के अलावा अन्य सरकारी इमारतें, चौक-चौराहों का सौंदर्यीकरण, रैन बसेरे, पार्किंग स्थल, लाइब्रेरी, म्यूजियम, अनाथालय, ओल्ड एज होम, चिड़ियाघर आदि-आदि की व्यवस्था कर शहरों को अधिक आकर्षक और शहरी जीवन को अधिक सुखमय बनाने के सपनों का बुना-गूंथा जाना बहुत सुहावना लगता है। आशंका इसी बात की है कि कहीं ये सपने सपने ही न रह जाएं। जब केंद्र सरकार ने ग्रामीणों का पलायन रोकने और रोजगार से जोड़ने के लिए नरेगा चलाया, उसके थोड़ा पहले ही शहरों को चमकाने के लिए जवाहरलाल नेहरू शहरी पुनरुत्थान मिशन लागू कर दिया था। थोड़ा विलंब से ही सही, झारखंड ने भी इसको अपनाया, लेकिन 11वीं पंचवर्षीय योजना बीत गई, जेएनएनयूआरएम अपने वास्तविक रूप में धरातल पर नहीं उतर पाया। यह तो भला हो 34वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी का, जो उसके नाम पर रांची और धनबाद में थोड़ा रंग-रोगन किया गया। जमशेदपुर पहले से ही अधिक चकाचक था, लेकिन इन खेलों के बहाने उस पर दृष्टि गई, लेकिन वह चकाचौंध वक्त के साथ अब धुंधली पड़ती जा रही है।
    अब 12वीं पंचवर्षीय योजना के लिए सरकार ने जो खाका तैयार किया है और 11वीं पंचवर्षीय योजना के बचे काम पूरे करने का मंसूबा दिखाया है, जब जागे तभी सवेरा की तर्ज पर यदि उस पर अमल कर लेती है तो भी उसको साधुवाद दिया जा सकता है। 12वीं पंचवर्षीय योजना के पहले वर्ष का चौथा महीना बीतने को है। समय गुजरते देर नहीं लगती। इसलिए सबसे पहला काम तो यही होना चाहिए कि योजना आयोग से इस प्लान को मंजूरी दिलायी जाय और उसके लिए आवश्यक साधन जुटा लिए जाएं। ऐसा होने के बाद ही उम्मीद बंध सकेगी कि प्लान पर काम सुचारू रूप से चल सकेगा। जिस तल्लीनता से सरकार ने प्लान बनाया है, उसको लागू कराने में वैसी तत्परता यदि न दिखाई गई तो पुरानी अवधारणा ही पुष्ट होगी कि झारखंड में विकास केवल कागजों तक सीमित रहता है।



    बदसलूकी पर अन्ना हजारे और उनकी टीम ने मीडिया से मांगी माफी

    रोशन, 31-Jul-2012 03:35:20 PM
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    बदसलूकी पर अन्ना हजारे और उनकी टीम ने मीडिया से मांगी माफी
    नई दिल्ली: बीती रात जंतर-मंतर पर अन्ना हजारे के करीब 100 समर्थकों ने मीडियाकर्मियों के साथ बदसलूकी और नारेबाजी की। ये समर्थक शांति भूषण के भाषण के बाद उत्तेजित हो गए थे।

    गांधीवादी समाजसेवक अन्ना हजारे और उनके सहयोगियों के अनशन का आज तीसरा दिन है। हजारे ने अपने समर्थकों द्वारा मीडिया पर किए गए हमले को लेकर अफसोस जताते हुए चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने फिर हिंसा की तो वह अनशन समाप्त कर देंगे।

    अनशन पर बैठे टीम अन्ना के एक सदस्य अरविंद केजरीवाल ने मीडिया के साथ दुर्व्यवहार की घटना को लेकर माफी मांगी लेकिन मीडिया घरानों के मालिकों पर दोष मढ़ने की कोशिश करते हुए कहा कि उन्हें यह तय करना होगा कि वह देश के साथ हैं या भ्रष्ट लोगों के साथ हैं।
    अन्ना और उनके साथियों के मंच पर पहुंचने से पहले कुछ समर्थकों ने मीडिया के खिलाफ नारे लगाए।  
    बीती रात जंतरमंतर पर टीम अन्ना के समर्थकों और मीडियाकर्मियों के बीच कुछ धक्कामुक्की भी हुई। अन्ना जंतरमंतर पर ही अनशन पर बैठे हैं।
    टीम अन्ना के एक सदस्य शांतिभूषण ने मीडिया पर आंदोलन को सही परिप्रेक्ष्य में पेश न करने का आरोप लगाया था जिसकी वजह से यह विवाद हुआ।
    ‘‘द ब्रॉडकास्ट एडीटर्स एसोसिएशन’’ :बीईए: ने घटना की निंदा तथा टीम अन्ना से माफी की मांग की।
    मीडिया पर हमले को लेकर अफसोस जाहिर करते हुए हजारे ने आज सुबह अपने समर्थकों से कहा कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अनिश्चितकालीन अनशन को समुचित न कवरेज न दिए जाने संबंधी आरोप को लेकर मीडिया पर हमले के बारे में सुन कर उन्हें दुख हुआ है।
    अन्ना ने कहा ‘‘अगर आप हिंसा करते हैं तो याद रखिये कि सरकार हमें दो दिन में कुचल सकती है। उनके पास ऐसा करने के लिए ताकत और कानून दोनों हैं। भविष्य में अगर ऐसी घटनाएं दोबारा हुईं तो मैं तत्काल अनशन समाप्त कर दूंगा।’’
    उन्होंने कहा ‘‘मैं इसकी :हिंसा की: मंजूरी नहीं देता। मीडिया को अपना काम करने दीजिये। वह क्या कर रहे हैं, इसे लेकर परेशान न हों।’’
    गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि अगर मीडिया कवरेज सही परिपे्रक्ष्य में नहीं है तो मीडिया को दोष देने के बजाय आत्मवलोकन कर देखें कि क्या समस्या है जिससे ऐसी खबरें आ रही हैं।
    उन्होंने कहा ‘‘मीडिया पर दोष मढ़ना गलत है। मीडिया के साथ कुछ लोगों द्वारा दुर्व्यवहार किए जाने पर मुझे अफसोस है।’’
    मीडिया से माफी मांगते हुए केजरीवाल ने कहा कि विरोध शांतिपूर्वक और अहिंसक तरीके से जारी रहना चाहिए। ‘‘ऐसा आचरण हम बर्दाश्त नहीं कर सकते।’’
    बहरहाल, उन्होंने कहा कि मीडिया घरानोंं के मालिकों को यह चयन करना होगा कि क्या वह सरकार के गलत काम में उसका समर्थन करेंगे या देश की सेवा के मिशन से जुड़ना चाहते हैं।
    टीम अन्ना के एक अन्य सदस्य मनीष सिसोदिया ने कहा कि कल जो कुछ हुआ, वह शर्मनाक है। उन्होंने कहा ‘‘हमारी लड़ाई मीडिया के साथ नहीं है।’’
    इस बीच, डॉक्टरों ने केजरीवाल और गोपाल राय को अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी है लेकिन दोनों ने ऐसा करने से मना कर दिया है। दोनों पिछले सात दिन से अनशन पर हैं और उनकी सेहत ठीक नहीं है।

    रोटी की तस्करी

    Updated on: Tue, 31 Jul 2012 06:05 AM (IST)
    सीमापार से जाली नोट, हथियार, मादक पदार्थ और अन्य तरह के सामानों की तस्करी तो आम हो चुकी है। परंतु, सीमापार रोटी की भी तस्करी शुरू हो जाएगी, शायद ही किसी को मान होगा। यह काफी गंभीर व चिंता बढ़ाने वाला विषय है। हमारे यहां पहले से ही लाखों लोग एक शाम के भोजन के लिए तरस रहे हैं। ऐसे में हजारों क्विंटल गेहूं अवैध रूप से सीमापार भेजे जाएंगे तो गरीबों का क्या होगा? गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले और अंत्योदय योजना के लिए आवंटित गेहूं को तस्करी के जरिए जहाज पर लाद कर बांग्लादेश भेजे जाने का भंडाफोड़ होने के बाद पता चला है कि गरीबों की रोटी भी तस्करों की नजर लग गई है। करीब 4500 क्विंटल गेहूं राशन दुकानों के माध्यम से गरीबों में बांटने के लिए एफसीआई गोदाम से बाहर निकला था। परंतु, शनिवार की दोपहर गेहूं सीधे खिदिरपुर डाक पहुंच गया, जिसे जहाज से बांग्लादेश भेजने की तैयारी हो रही थी। ऐन वक्त पर पुलिस ने छापामार कर गेहूं तथा अन्य सामान जब्त कर लिया। 36 ट्रकों व जहाज को पुलिस ने जब्त किया है। साथ ही 13 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है। लेकिन, सवाल यह उठ रहा है कि क्या गरीबों के लिए आए गेहूं पहली बार बांग्लादेश भेजा जा रहा था? या इससे पहले भी कई खेप गेहूं बांग्लादेश भेजा जा चुका है? इतनी बड़ी हेराफेरी के पीछे कौन लोग हैं? क्योंकि जिस तरह से दिनदहाड़े माल बंदरगाह पर जहाज में लादे जा रहे थे, उससे यह प्रमाणित होता है कि इस गोरखधंधे से जुड़े लोगों का हाथ व हिम्मत दोनों ही मजबूत है। फूड कार्पोरेशन आफ इंडिया के गोदाम से 4500 क्विंटल गेहूं निकलने के बाद सीधे बंदरगाह पहुंच जाता है। वह भी दिनदहाड़े। जब दिन के उजियारे में इतना सब कुछ हो रहा था, तो रात के अंधेरे में क्या हुआ होगा। इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। बहरहाल इस घटना को लेकर राज्य खाद्य विभाग के होश उड़े हुए हैं। खाद्यमंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक ने तत्काल जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। मामले में गिरफ्तार अभियुक्तों से पूछताछ कर पुलिस कुछ गोदामों में छापामारी भी की है। फिलहाल जांच के प्रथम चरण में कहा जा रहा है कि इस धंधे में तीन फ्लावर मिलों के संलिप्त रहने की आशंका है। लेकिन, क्या इससे पहले जो गेहूं सीमापार चला गया होगा उसे क्या वापस लाया जा सकेगा? यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। यदि बीपीएल और अंत्योदय योजना के लिए गेहूं एफसीआई गोदाम से निकला तो खाद्य विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना नहीं थी? ऐसा तो हो नहीं सकता। इसीलिए जांच एजेंसियों को चाहिए कि वह इस मामले में जुड़े हर एक अभियुक्तों को गिरफ्तार कर उनसे गरीबों की रोटी का हिसाब ले।

    बेहतर होगी स्कूली शिक्षा

    Updated on: Tue, 31 Jul 2012 06:05 AM (IST)
    राज्य सरकार स्कूली शिक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बीएसइबी) में ढांचागत सुधार, बड़े पैमाने पर शिक्षकों का नियोजन कर छात्र-शिक्षक अनुपात को मानक के करीब लाना, नवनियुक्त शिक्षकों की परीक्षा लेकर पढ़ाई की गुणवत्ता का स्तर ठीक रखने का प्रयास और इसके बाद नये शिक्षकों की भर्ती के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने को अनिवार्य बनाया जाना - ये सारे कदम बुनियादी और विद्यालयी पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए उठाये गए। गत सप्ताह इस दिशा में कुछ और निर्णय हुए। इनमें से एक फैसला ऐसा है, जिससे लगता है कि बिहार बोर्ड देश के दूसरे एक्जामिनेशन बोर्ड से स्पर्धा करने का संकल्प कर चुका है। बीएसइबी ने मैट्रिक व इंटर की परीक्षा प्रणाली में अगले वर्ष, यानी 2013 से बदलाव करने की व्यवस्था की है। इसके अनुसार बोर्ड मात्र 70 प्रतिशत अंकों की परीक्षा लेगा, शेष 30 प्रतिशत स्कूलों के अंकों का वेटेज रिजल्ट में दिया जाएगा। इन 70 प्रतिशत अंकों के लिए भी अब वस्तुपरक (आब्जेक्टिव) प्रश्न ही पूछे जाएंगे। 30 प्रतिशत अंकों के लिए स्कूलों में दो परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी, जिसमें सब्जेक्टिव व आब्जेक्टिव प्रश्न पूछे जाएंगे। अगले साल 14 लाख छात्र-छात्राओं के शामिल होने की उम्मीद है। इनके लिए नई व्यवस्था यह भी होगी कि जो छात्र पहली पाली में परीक्षा देंगे, वे दूसरी पाली की परीक्षा में शामिल नहीं होंगे। दोनों पाली के प्रश्न पत्र अलग-अलग होंगे। बोर्ड ने जहां परीक्षा पद्धति में बदलाव किया है, वहीं कुछ परिवर्तन शिक्षकों की सुविधा को ध्यान में रख कर सरकार ने किये हैं। इसके अनुसार अब नियोजित शिक्षकों को वेतन के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। हर माह सीधे उनके बैंक खातों में वेतन की राशि चली जाएगी। यह व्यवस्था सभी 38 जिलों में लागू होगी, जिससे प्रारंभिक और माध्यमिक नियोजित शिक्षकों को लाभ मिलेगा। यह निर्णय शुक्त्रवार को शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम ने प्रेजेंटेशन के जरिये शिक्षकों को वेतन भुगतान संबंधी कार्य योजना की जानकारी दी। एक और नई पहल होगी, जिसके तहत शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों के फैकल्टी माध्यमिक विद्यालयों में शैक्षणिक निरीक्षण की जिम्मेवारी संभालेंगे। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिये गए हैं। इसे प्रारंभिक शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए ठोस कदम बताया गया है, क्योंकि अभी तक माध्यमिक विद्यालयों में निरीक्षण ही नहीं हो रहा था।

    जर्जर ढांचे का नतीजा

    Updated on: Tue, 31 Jul 2012 06:05 AM (IST)
    पहले से ही बिजली संकट से जूझ रहे देश में उत्तरी ग्रिड फेल होने से सात राज्यों में जनजीवन जिस तरह बाधित हुआ उससे एक बार फिर यह साबित हुआ कि भारत में बिजली का ढांचा अभी भी जर्जर बना हुआ है। ग्रिड फेल होने से जिस बड़े पैमाने पर संकट उत्पन्न हुआ और उसके चलते उत्तार भारत के करोड़ों लोग प्रभावित हुए उससे भारत की ऊर्जा क्षमता पर नए सिरे से प्रश्नचिह्न लगा है। चिंताजनक केवल यह नहीं है कि ग्रिड फेल हो गया, बल्कि यह भी है कि 18 घंटे बाद भी यह नहीं जाना जा सका कि वस्तुत: ऐसा किन कारणों से हुआ? यही कारण रहा कि राज्यों में दोषारोपण शुरू हो गया। दिल्ली की मानें तो ग्रिड फेल होने के लिए उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब जिम्मेदार हैं, क्योंकि इन्होंने अपने कोटे से च्यादा बिजली ले ली। हालांकि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री भी कुछ इसी नतीजे पर पहुंचते दिखे, लेकिन उनके पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं कि जब कुछ राच्य जरूरत से च्यादा बिजली ले रहे थे तो उन्हें रोका क्यों नहीं जा सका? क्या ग्रिड इसलिए फेल हुआ, क्योंकि निगरानी व्यवस्था भी फेल हो गई थी? इन सवालों के जवाब सामने आना इसलिए आवश्यक है, क्योंकि ग्रिड फेल होने के लिए कोयले की कमी को भी जिम्मेदार माना जा रहा है। सच्चाई जो भी हो, इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि कोयले का उत्पादन और उसकी ढुलाई बुरी तरह प्रभावित है। विडंबना यह है कि विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों की तकरार के कारण ही कोयले का मसला एक लंबे अर्से से कलह का कारण बना हुआ है। जितना गंभीर ग्रिड का फेल होना है उतना ही यह भी कि बिजली की आपूर्ति बहाल करने में आवश्यकता से अधिक समय लग गया। किसी आपदा की स्थिति में इतना व्यापक बिजली संकट भयावह परिणामों वाला हो सकता है। हालांकि केंद्रीय बिजली मंत्री ने ग्रिड फेल होने के कारणों की जांच के लिए एक समिति गठित कर दी है, लेकिन इसमें संदेह है कि यह समिति उन कारणों पर सही ढंग से प्रकाश डाल सकेगी जिनके चलते इतना बड़ा संकट पैदा हुआ। संदेह इस पर भी है कि इस समिति की सिफारिशों पर सही ढंग से विचार किया भी जाएगा या नहीं? ऐसा इसलिए, क्योंकि इसके पहले उत्तारी ग्रिड फेल होने पर ही जो समिति बनाई गई थी उसकी सिफारिशों पर आधे-अधूरे ढंग से अमल हुआ। ग्रिड फेल होने से उत्पन्न संकट पर ऊर्जा मंत्री ने जिस तरह यह कहकर अपने तंत्र को बेहतर साबित करने की कोशिश की उसका कोई महत्व नहीं कि 2008 में जब अमेरिका में बिजली संकट पैदा हुआ था तो वहां के लोगों ने भारत से मदद मांगी थी। तथ्य यह है कि अमेरिका ने बिजली संकट पर काबू पा लेने के कई दिनों बाद भारत से यह जानकारी हासिल करने पर विचार किया था कि वह ग्रिड फेल होने की स्थिति में किस तरह संकट से पार पाता है। बेहतर हो कि ऊर्जा मंत्री यह समझें कि बिजली के ढांचे में व्यापक सुधार की जरूरत है और इसके लिए मौजूदा तौर-तरीकों से काम चलने वाला नहीं है। भारत बिजली संकट के मुहाने पर बैठा है। चिंताजनक यह है कि यह संकट दिन-प्रतिदिन बढ़ता चला जा रहा है। इस स्थिति में ऐसे दावे करना व्यर्थ है कि पिछले वर्षो की अपेक्षा च्यादा बिजली पैदा की जा रही है, क्योंकि चंद राच्यों को छोड़कर देश के किसी भी हिस्से को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है।

    ट्रेन हादसा: नहीं हो सकी 18 शवों की शिनाख्त

    Updated on: Tue, 31 Jul 2012 03:20 PM (IST)
    train accident: 18 body are still not get identified
    ट्रेन हादसा: नहीं हो सकी 18 शवों की शिनाख्त
    हैदराबाद। आंध्र प्रदेश के नेल्लोर में सोमवार को तमिलनाडु एक्सप्रेस अग्निकांड में मारे गए 32 यात्रियों में से 18 की पहचान अब तक नहीं हो पाई है, जबकि मंगलवार को फोरेसिक दल ने आग की चपेट में आई रेलगाड़ी की एस-11 बोगी का निरीक्षण भी किया है।
    लापता यात्रियों के परिजन मान रहे है कि उनके प्रियजन इस दुर्घटना के शिकार बन गए और वे उनकी पहचान के लिए नेल्लोर स्थित दुर्घटना स्थल पहुंच रहे है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि मारे गए 32 लोगों में से केवल 14 की पहचान हो सकी है।
    गौरतलब है कि नई दिल्ली-चेन्नई सुपर फास्ट एक्सप्रेस रेलगाड़ी की बोगी एस-11 में सोमवार तड़के नेल्लोर रेलवे स्टेशन के नजदीक आग लग जाने से 32 लोग जलकर मर गए वहीं 27 घायल हो गए थे।
    मृतकों के शव नेल्लौर रेलवे स्टेशन से शहर के सरकारी अस्पतालों में भेज दिए गए है। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि परिजनों के पहचानने के लिए शव मंगलवार शाम तक अस्पताल में रखे जाएंगे। इसके बाद उन्हे तमिलनाडु में पेराम्बुर रेलवे अस्पताल में रखा जाएगा। रेलवे अस्पतालों में शवों को संरक्षित रखने के लिए सभी व्यवस्थाएं कर ली गई है।
    बताया जाता है कि ज्यादातर शव बुरी तरह से जल गए है, इसलिए उनकी पहचान करने में मुश्किलें हो रही है। अधिकारियों ने परिजनों द्वारा शवों को अपना रिश्तेदार बताने का दावा किए जाने की स्थिति में उनके डीएनए परीक्षण किए जाने की भी तैयारी कर ली गई है।
    अब तक जिन 14 शवों की पहचान हुई है, उनमें से छह आंध्र प्रदेश से, पांच चेन्नई से और तीन अमृतसर से है। दुर्घटना में कुछ जीवित बचे लोग व कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उन्होंने बोगी में आग की लपटे उठने से पहले विस्फोट की आवाज सुनी थी। फोरेंसिक दल को बोगी में केरोसिन तेल के अवशेष मिले है। हालांकि शॉर्ट सर्किट को ही आग लगने की प्राथमिक वजह बताया जा रहा था।
    नेल्लौर में सोमवार रात दुर्घटना स्थल का दौरा कर चुके रेल मंत्री मुकुल राय ने कहा है कि रेलवे सुरक्षा आयुक्त सभी दृष्टिकोणों से इस हादसे की जांच करेगे।

    • बर्निंग ट्रेन, चपेट में कई यात्री
    • खाक हुई ट्रेन की बोगियां
    • हादसांे की भारतीय रेल
    • दर्दनाक हादसा, 4 बच्चों की मौत

    एक साथ 20 मौतों से दहला यह शहर, बिलख-बिलख कर रोए लोग

    Source: dainik bhaskar news   |   Last Updated 08:35(31/07/12)

     
    कैथल. ज्वाला झाड़ी में मन्नत पूरी करने गए कई घरों के चिराग बुझ गए। हादसे में किसी ने बाप खो दिया तो किसी ने मां।

    पार्षद दंपती की मौत के बाद राणा मोहल्ला में मातम का माहौल था। रोहताश के एक ही परिवार के तीन सदस्य मौत के आगोश में समा गए। मां बेटे की मौत से भी रामरति के परिवार पर कहर टूट गया। सड़क दुर्घटना में कस्बा कलायत के 20 लोगों की जान चली गई। वार्ड नंबर सात के पार्षद श्याम सिंह राणा और उनकी पत्नी भतेरी की मौत के बाद सब बदहवास थे।

    घर के बाहर गली में विलाप कर रहे वृद्ध चाचा फग्गू सिंह की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। फग्गू राम ने कहा कि डेढ़ महीने पूर्व उसके पोते की मौत हो गई थी। अभी वह गम भूला भी नहीं पाया था कि श्याम राणा और उसकी पत्नी की मौत से उसका सब कुछ लूट गया। उसका भतीजा श्याम राणा उन्हें हर माह पेंशन लाकर देता था और गली मोहल्ले में सबका दुख दर्द साझा करता था। श्याम राणा की गोद ली बेटी रज्जी ने सुबह सात बजे श्याम राणा को फोन पर लौटने बारे पूछा तो उन्होंने 11 बजे तक आने की बात कही लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। दंपती की मौत के बाद परिवार सदमे में हैं।

    हादसे में रोहताश का परिवार भी मौत के आगोश में समा गया। रोहताश के परिजन बेसुध हैं और उनका रो-रोकर बुरा हाल है। पड़ोसी धर्मपाल, ऋषिपाल, ज्ञान सिंह, कृष्ण और बलजीत ने बताया रोहताश बड़ा ही होनहार था। महीपाल के घर में भी चीत्कारें गूंज रही थी। हादसे में टाटा मालिक महीपाल और उसकी मां चमेली की भी जान चली गई।

    बैरागी मोहल्ला से सूरत, कर्म सिंह और पवन ने बताया कि घटना के बाद पूरा गांव शोक में डूबा हुआ है। किसी भी के घर में चूल्हा नहीं जला। हर कोई मृतकों के परिवारों को सांत्वना दे रहा है। कृष्ण और ज्ञान सिंह ने बताया कि मन्नत पूरी करने के लिए हर महीने ये लोग ज्वाला झाड़ी जी के दर्शन करने जाते थे। लेकिन इस घटना से पूरा गांव सदमे में हैं।


    हादसे में कोटड़ा गांव के रामस्वरूप और उसके बेटे अजय, रामरति उसका बेटा आशु, थुआ की डेढ़ माह की बच्ची काजल, सींसर के बिट्टू, किराली पिहोवा जिला कुरुक्षेत्र के ओमप्रकाश और उसकी पत्नी खजानी को भी मौत ने लील लिया।
    स्पीड, नींद, तख्ते और सदमा मौत की वजह
    कैंटर की तेज स्पीड, पीछे नींद में सोए लोग, ज्यादा से ज्यादा लोग कैंटर में आ सकें इसके लिए कैंटर में तख्तों से बने दो पार्टीशन और नींद में सोए लोगों पर टूटे तख्ते गिरना। अगर ऐसा नहीं होता तो सैनीवास के नजदीक हुए सड़क हादसे में मृतकों की संख्या इतनी नहीं होती। यह बात अभी तक इस हादसे के कारणों का जांच कर रही पुलिस के सामने आई है। पुलिस के अनुसार जिस समय यह हादसा हुआ तब कैंटर में बच्चों सहित 62 लोग थे।
    इन सबके लिए कैंटर के बीच में काठ के तख्ते लगाकर दो पार्टीशन बनाए हुए थे। देखा जाए तो सैनीवास मोड़ इतना खतरनाक नहीं कि वहां इतना बड़ा हादसा हो। हादसे के समय ट्रक चढ़ाई चढ़ रहा था तो कैंटर उतर रहा था। इसलिए माना जा रहा है कि हादसे के समय ट्रक की बजाए कैंटर की स्पीड ज्यादा रही होगी।
    इसके अलावा ट्रक चालक ने कैंटर से बचने के लिए ट्रक को सड़क से नीचे उतारा हुआ है। इससे लगता है कि कैंटर चालक को झपकी आई होगी। इससे वह बेकाबू होकर ट्रक में जा घुसा। कैंटर की बॉडी ट्रक की अपेक्षा कमजोर होती है। इसलिए कैंटर की बॉडी सिकुड़कर पीछे वाले हिस्से में धंसी तो पार्टीशन के लिए बनाए तख्ते टूट गए।
    उस समय कैंटर के दोनों पार्टीशन में अधिकतर लोग सोए हुए थे। भिवानी में 24 शवों का पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. मनीष पचार, डीपी यादव, नरोत्तम गोयल, संदीप चौधरी, कृष्ण कुमार और सचिन सहगल ने किया। डॉक्टरों ने बताया कि एक मृतक की छाती से काठ का तख्ता आर पार निकला हुआ था। इस तरह के मामलों में कुछ लोगों की मौत सदमें से भी हो जाती है।
    सिवानी के थाना प्रभारी दलीप सिंह किरड़ोलिया ने बताया कि घटना के समय शायद कैंटर चालक को झपकी आई होगी। इससे कैंटर सामने से आ रहे ट्रक से जा टकराया। उन्होंने बताया कि घटना के समय ट्रक चढ़ाई कर रहा था वहीं कैंटर उतर रहा था। इससे लगता है कि कैंटर की स्पीड भी तेज होगी। यही सब कारण इस हादसे का कारण बने हो सकते हैं।

    क्या कीड़े-मकोड़े खाने होंगे 20 साल बाद?

     मंगलवार, 31 जुलाई, 2012 को 08:23 IST तक के समाचार

    भविष्य का खाना
    बढ़ती महंगाई और जनसंख्या को देखते हुए जानकार इस बारे में सोचने लगे हैं कि भविष्य में हमारा खाना क्या होगा. अब से 20 साल बाद हम कैसा खाना परोस रहे होंगे?
    खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों, बढ़ती आबादी और उन्हें लेकर पर्यावरणविदों की चिंताओं ने भविष्य में भोजन को लेकर संयुक्त राष्ट्र के साथ-साथ सरकारों की परेशानी भी बढ़ा दी है.
    अनुमान है कि अकेले ब्रिटेन में अगले पांच से सात वर्षों में गोश्त के दाम दोगुने हो सकते हैं जिससे वो आम लोगों की पहुंच से बाहर हो सकता है.
    भविष्य में भोजन के स्वरूप पर काम करने वाली मोर्गन गाए का कहना है, “खाद्य पदार्थों के बढ़ते दामों की वजह से हम उस दौर की वापसी देख रहे हैं जब गोश्त समृद्धि से जुड़ जाएगा. इसका मतलब है कि हमें गोश्त के कारण पैदा होने वाली खाई को पाटने के तरीके तलाशने होंगे.”
    तो ये तरीके क्या हो सकते हैं- हमारा भोजन किस तरह का होगा? नीचे बने लिंक्स पर क्लिक करके देखिए-
    गाए का कहना है कि हमारे खाने में कीड़े-मकोड़ों की अहम जगह हो सकती है.
    दरअसल नीदरलैंड्स के वागेनिनगेन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अनुसार कीड़े मकोड़ों में भी आम गोश्त के जितने पोषक तत्व पाए जाते हैं, जबकि उन पर मवेशियों की तुलना में कम लागत आती है.
    उन्हें पानी भी कम चाहिए होता है और पर्यावरण के बढ़ते तापमान से जुड़ी चिंताओं से भी उनका उतना लेना देना नहीं है.
    इतना ही नहीं, कीड़े-मकोड़ों की 1400 ऐसी प्रजातियां हैं जिन्हें इंसान खा सकता है.
    भविष्य का खाना
    दुनिया के कई हिस्सों में की़ड़े मकोड़े खाए जाते हैं.
    गाए यह नहीं कह रही हैं कि जल्द की आपकी तश्तरी में समूचे कीड़े मकोड़े परोसे जाने लगेंगे, बल्कि वह मानती हैं कि बर्गर और सॉसेज में कीड़े इस तरह इस्तेमाल हो सकते हैं कि वो आपको समूचे दिखाई न दें.
    वैसे दुनिया के कई हिस्सों में कीड़े-मकोड़े पहले से ही लोगों के खाने का हिस्सा हैं. अफ्रीका में कैटरपिलर और टिड्डी को शौक से खाया जाता है तो जापानी लोग ततैंयों को चाव के खाते हैं.
    वहीं थाईलैंड में कीट पतंगों को खाने का चलन रहा है.
    लेकिन गाए कहती हैं कि अगर कीड़े-मकोड़ों को बड़े पैमाने पर खाने का हिस्सा बनाना है तो उन्हें लेकर आम धारणाओं को बदलना होगा.