31.7.12

इतनी तेज़ तैराक!

 सोमवार, 30 जुलाई, 2012 को 21:42 IST तक के समाचार
    चीन की 16 वर्षीया तैराक ये शिवेन इतना तेज़ तैरीं कि सब हैरान रह गए हैं. 400मीटर मेडले के आखिरी 50मीटर की दूरी उन्होंने मात्र 28.93 सेकंड में पूरी कर ली.
    इतनी तेज़ी से तो पुरूषों के स्वर्ण पदक विजेता अमरीकी तैराक रायन लोटे भी नहीं तैरे जिन्होंने इसके लिए 29.10 सेकंड लिए.
    ये शिवेन की गति देख बीबीसी कमेंटेटर क्लेयर बाल्डिंग भी दंग रह गईं और उनके मुँह से निकल पड़ा – मार्क, कोई यदि अचानक इतनी तेजी से तैर जाए तो फिर पता नहीं कितने सवाल पूछे जाएँगे?
    विशेषज्ञ और पूर्व ब्रिटिश ओलंपियन मार्क फ़ोस्टर से पूछा गया ये सवाल संवेदनशील था क्योंकि पहले चीन के कुछ तैराक ड्रग स्कैंडल में फँस चुके हैं, पिछले महीने एक महिला विश्व चैंपियन पोज़िटिव भी पाई गई थीं.
    मगर मार्क ने बात संभाल ली, वो बोले – ये शिवेन 16 साल की हैं, उनकी उम्र को देखा जाए तो उन्होंने जो किया वो बिल्कुल संभव है.

    गिनती ने गड़बड़ाया


    खलील अल माओइ को लगा वो जीत गए हैं
    ट्यूनीशिया लंदन ओलंपिक में अपना पहला मेडल जीतते-जीतते रह गया, और ये हुआ एक कोच की कमज़ोर गिनती के कारण.
    मुक़ाबला 56 किलोग्राम वर्ग में भारोत्तोलन का था. ट्यूनीशियाई खिलाड़ी खलील अल माओइ ने वज़न उठाया. वे दूसरे नंबर पर थे. उन्हें लगा कि उन्होंने 158 किलो वज़न उठाया है. और उन्हें लगा वो जीत गए.
    फिर दूसरे दौर के लिए वो वज़न उठाने आए ही नहीं.
    बाद में पता चला जो वज़न उन्होंने उठाया था वो 10 किलो कम यानी केवल 148 किलोग्राम था और कोच ने लिखवाया 158.
    माओइ अब कोच को कोस रहे हैं कि उनकी ग़लत गिनती ने सब गुड़गोबर कर दिया.

    टूटी पटवार, टूटा सपना


    पतवार टूटने के समय टीम तीसरे नंबर पर थी
    नौकायन प्रतियोगिता में न्यूज़ीलैंड की महिला टीम तेज़ी से आगे बढ़ रही थी जब उनके सपनों पर पानी फिर गया.
    1500 मीटर की दूरी पर अंतिम नंबर पर रहनेवाली चार खिलाड़ियों की टीम आहिस्ता-आहिस्ता दूसरी टीमों को पीछे छोड़ आगे निकल रही थी.
    फ़ाइनल में पहुँचने के लिए अंतिम चार में रहना ज़रूरी था, वो तीसरे नंबर पर थीं, जब अचानक एक खिलाड़ी की पतवार पानी के भीतर फँस गई और फिर टूट गई.
    इसके बाद बेबस खिलाड़ी केवल दूसरी नौकाओं को आगे निकलता देखती रहीं. उन्होंने रेस पूरी की, मगर उनकी नाव फ़िनिशिंग लाइन को पार करनेवाली अंतिम नाव रही.

    लौट के बुद्धू...

    टेक्नोलॉजी बड़ी तेज़ी से आगे बढ़ती जा रही है, ऐसी-ऐसी चीज़ें साकार होने लगी हैं जो कल तक सपना लगती थीं.
    तो लंदन ओलंपिक के कुछ आयोजकों ने एक सपना देखा – कि ये ओलंपिक ऐसा हो जो कैशलेस ओलंपिक हो. यानी कहीं भी किसी को नकद रूपया-चिल्लर निकालने की ज़रूरत नहीं पड़े.
    डेबिट-क्रेडिट कार्ड तो हैं ही, ओलंपिक आयोजक अमरीकी कंपनी वीज़ा ने यहाँ सैम्संग गैलेक्सी मोबाइल फ़ोन पर फ़ोन से ही पेमेंट करने की एक सुविधा जारी कर दी.
    मगर वेम्ब्ली स्टेडियम में ब्रिटेन और सउदी अरब के मैच के दौरान ये सारी योजना धरी की धरी रह गई, कुछ तकनीकी कारण से वीज़ा के कार्डों ने काम करना बंद कर दिया.
    बस फिर क्या था, जिनके पास पाउंड-पेन्स थे, वो खाना-पीना खरीद सके, बाकी एटीएम मशीन का रास्ता पूछते रहे.

    गूगल ज्ञानी


    उदघाटन समारोह में टिम बर्नर्स ली
    अमरीकी ब्रॉडकास्टर एनबीसी बहुत ज़ोर-शोर से लंदन ओलंपिक कवर करने पर पहुँचा है, मगर उनकी शुरूआत अच्छी नहीं रही.
    एक तो ओपनिंग समारोह को लाइव के बदले कुछ देर से दिखाने को लेकर उनकी आलोचना हो रही है. दूसरा कारनामा उनके कमेंटेटरों ने किया.
    ओपनिंग समारोह की एक ख़ास घड़ी थी, वर्ल्ड वाइड वेब का आविष्कार करनेवाले ब्रिटेन के वैज्ञानिक सर टिम बर्नर्स ली को स्टेडियम में बुलाया जाना.
    टिम ने स्टेडियम से ही दुनिया को ट्वीट किया – दिस इज़ फ़ॉर एवरीवन.
    और एनबीसी के कमेंटेटर बोले – हू इज़ ही? बल्कि एक ने तो लोगों को टिम के बारे में जानने के लिए गूगल करने के लिए भी कहा.
    और टेक्नोलॉजी की समझ रखनेवालों ने उनकी इस बात को सुन केवल सिर हिलाया.
    गूगल करना ही असंभव होता, यदि टिम बर्नर्स ली ने वेब का आविष्कार नहीं

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