8.8.12

मनुस्मृति के अध्याय 9 के श्‍लोक 318 में तो ब्राह्मणों की श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिये यहॉं तक लिख दिया है कि-

मनुस्मृति के अध्याय 9 के श्‍लोक 318 में
 
‘‘ब्राह्मण चाहे कितने ही त्याज्य और निन्दनीय
कुकर्म करता हो, कुकर्मों में लीन ही क्यों न रहता हो,
लेकिन फिर भी ब्राह्मण पूज्यनीय ही है, क्योंकि वह
ब्राह्मण कुल में जन्म लेने के कारण
परमदेव अर्थात् सर्वोत्तम देवता है|’’
‘‘ब्राह्मण चाहे कितने ही त्याज्य और निन्दनीय कुकर्म करता हो, कुकर्मों में लीन ही क्यों न रहता हो, लेकिन फिर भी ब्राह्मण पूज्यनीय ही है, क्योंकि वह ब्राह्मण कुल में जन्म लेने के कारण परमदेव अर्थात् सर्वोत्तम देवता है|’’

इसके बाद कुछ भी कहने को शेष नहीं रह जाता है, लेकिन फिर भी ब्राह्मणों की मनमानी व्यवस्था की कभी न समाप्त होने वाली इस महागाथा को अल्पविराम देने से पूर्व यह जरूर लिखना चाहूँगा किपरशुराम की जयन्ति मनाने वाले ब्राह्मणों और मनु को भगवान मानने वाले ब्राह्मणों की दृष्टि में उनका हर कदम पर साथ देने वाली ‘‘मातृशक्ति’’ अर्थात् स्त्री का कितना सम्मान है?
‘‘स्त्रियों के साथ मैत्री नहीं हो सकती|
इनके दिल लक्कड़बग्घों से भी क्रूर होते हैं|’’
देखें-ॠगवेद मंत्र (10/95/15)

1. ‘‘स्त्री मन को शिक्षित नहीं किया जा सकता| उसकी बुद्धि तुच्छ होती है|’’ देखें-ॠगवेद मंत्र (8/33/17)

2. ‘‘स्त्रियों के साथ मैत्री नहीं हो सकती| इनके दिल लक्कड़बग्घों से भी क्रूर होते हैं|’’ देखें-ॠगवेद मंत्र (10/95/15)

3. ‘‘कृपणं ह दुहिता’’ अर्थात्-‘‘पुत्री कष्टप्रदा, दुखदायिनी होती है|’’देखें-ब्राह्मण ग्रंथ, ऐतरेय ब्राह्मण मंत्र (7/3/1)

4. ‘‘पुरुषों को दूषित करना स्त्रियों का स्वभाव ही है| अत: बुद्धिमामनों को स्त्रियों से बचना चाहिये|’’ देखें-मनुस्मृति, अध्याय-2 (श्‍लोक-217)

5. ‘‘शास्त्र की यह मर्यादा है कि स्त्रियो के संस्कार वेदमन्त्रों से नहीं करने चाहिये, क्योंकि स्त्रियॉं मूर्ख और अशुभ होती हैं| (एक स्थान पर लिखा है कि क्योंकि निरेन्द्रिय व अमन्त्रा होने के कारण स्त्रियों की स्थिति ही असत्य रूप होती है)’’देखें-मनुस्मृति, अध्याय-9 (श्‍लोक-18)

6. ‘‘विधवा स्त्री को दुबारा विवाह नहीं करना चाहिये, क्योंकि ऐसा करने से धर्म का नाश होता है|’’ देखें-मनुस्मृति, अध्याय-9 (श्‍लोक-64)

‘‘स्त्रियॉं कौनसा दुष्कर्म नहीं कर सकती|’’
देखें-चाणक्यनीतिदर्पण, अध्याय-10 (श्‍लोक-4)

7. ‘‘स्त्रियॉं कौनसा दुष्कर्म नहीं कर सकती|’’ देखें-चाणक्यनीतिदर्पण, अध्याय-10 (श्‍लोक-4)

और भी बहुत कुछ है, जो इस देश के 98 फीसदी लोगों को मूर्ख बनाकर, उनपर हजारों सालों से शासन करने वाले दो फीसदी, उन लोगों की असलीयत सामने लायेगा, जो मूल आर्य संस्कृति को फिर से इस देश पर लागू करने का षड़यंत्र रचते रहते हैं और इस षड़यंत्र में अनेक अनार्यों को भी शामिल कर लिया है| सावधान!



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